Description
मेरी कल्पनाओ का चाँद, जो मेरे जीवन की कुछ भावनाओं, कल्पनाओं को समेटे है! कुछ प्यार, कुछ उलझनों में उलझी मेरी ‘चन्द्री – एक प्रेम कविता’ जिसमे प्रेम की चाह के साथ दुनिया का डर, परिवार का साथ और प्रभु की बनाई दुनिया की शिकायत है, चाहत है, वादें है, साथ जीने की इच्छा और तड़फते मन की व्यथा है! ‘चन्द्री’ जीवन के अनेक बिन्दुओं को छूती है कभी प्रेम, कभी ख्याल, कभी वास्तविकता में विचरती है और एक अधूरी प्रेम कहानी की तरह अधूरी ही है जो पूरी नही होती और ये ही प्यार की सार्थकता है, उसका चरम है, उत्कर्ष है, जादू है और आकर्षण का मूल मन्त्र है! ‘चन्द्री’ प्रेम, वफ़ा को परिभाषित करने की काेशिश है, दिल का जुनून है, चाहतों और कर्तव्यों में द्वन्द है, मन की बेबसी और उड़ने की उमंग है, और अंतत: चन्द्री एक ख्वाब है, ख्याल है, हकीकत है पर हकीकत से परे है।













