Description
प्रस्तुत उपन्यास में फ़ख़रे आलम खान ने समसामयिक सामाजिक व्यवस्था को कथानक का ताना-बाना बनाया है। उपन्यास मे लेखक ने नारी की स्थिति को दिखाने का प्रयास किया है कि कैसे एक नारी कठिन और विपरित परिस्थतियों मे रहकर भी एक मुकाम हासिल कर सकती है। उन्होने यह संदेश देने का प्रयास किया है कि आज के युग में बेटी और बेटे में कोई अंतर नही रहा है।













