Description
सामाजिक कुरीतियों के मकड़जाल में उलझी नारी की व्यथा की दास्तान, जिसे अभागन के अलावा और कोई नाम न दिया जा सकता था। पर, उस नारी का नाम है शशि। शशि चन्द्रमा का पर्याय होता है। चन्द्रमा की चन्द्रकलाएं जैसे अंधेरा और उजला पक्ष लेकर चलती हैं; ठीक उसी तरह उपन्यास की कहानी अनेकों मोड़ से गुज़रती चौदहवीं के चाँद की ज्योत्सना बिखेरते हुए उपसंहार पर पहुंचती है।
नारी की नई सोच और नई गरिमा को स्थापित करता सामाजिक उपन्यास-अभागन।













